Jallianwala Bagh history in hindi।

Jallianwala Bagh history in hindi। 

जलियावाले बाग की घटना 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियां वाले बाग में हुई। इस घटना का मुख्य कारण रौलट एक्ट का विरोध करना है, तो इसलिए हमें सबसे पहले रोलेट एक्ट के बारे में जानना होगा

रोलेट एक्ट क्या था ?What was Rowlatt Act in hindi?

प्रथम विश्व युद्ध में अहम योगदान देने पर भारतीयों को यह आशा थी कि युद्ध में भारतीयों के अहम योगदान को देखकर अंग्रेजी सरकार भारत को आजादी दे देगी, परंतु अंग्रेजी सरकार ने ऐसा नहीं किया। अंग्रेजी सरकार के इस बर्ताव को देखकर भारतीयों में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध रोष की लहर दौड़ पड़ी, क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध में 43,000 भारतीयों ने अपनी शहादत दी थी। आजादी देने की जगह अंग्रेजी सरकार, भारतीयों की आजादी के संघर्ष को कुचलने की तैयारी करने लगी। इस उदेश को ध्यान में रखकर, अंग्रेजी सरकार ने 1918 में एक ब्रिटिश जज सिडनी रौलेट की अध्यक्षता में एक समिति बनाई। इस समिति का मुख्य कार्य यह पता लगाना था, कौन-कौन से नेता आजादी के संघर्ष में अपना योगदान दे रहे हैं।
 4 महीने की खोज के बाद इस समिति ने अपनी रिपोर्ट अंग्रेजी सरकार के सामने प्रस्तुत की। आगे चलकर इस समिति ने अंग्रेजी सरकार के सामने कुछ सिफारिशें पेश की, जिसे  ब्रिटिश भारत के लेजिस्लेचर एवं इम्पिरियल लेजिस्लेटिव कांउसिल द्वारा पारित किया गया, और यह कानून बन गया। इस कानून को काला कानून के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इस कानून का अध्यक्ष जज सिडनी रोलेट था, इसलिए इस कानून को रौलट एक्ट का नाम दिया गया। रॉलेक्ट एक्ट को काला कानून इसलिए कहा गया क्योंकि इस कानून के मुताबिक अंग्रेजी सरकार किसी भी व्यक्ति को शक के आधार पर गिरफ्तार कर सकती थी तथा उस पर मुकदमा चला कर उसे सजा भी दे सकती थी। इस कानून को ना वकील, ना अपील, ना दलील के नाम से भी जाना जाता है। यह कानून प्रेस के ऊपर भी प्रतिबंध लगा सकता था। इसलिए भारत के बड़े नेताओं ने इस कानून का विरोध किया।

जलियांवाला बाग की घटना। Jallianwala Bagh history in hindi। 

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रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए पंजाब के विभिन्न इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया गया। आजादी की मुहिम को तेज करने के लिए महात्मा गांधी के कहने पर 30 मार्च और 6 अप्रैल को शांतमयी ढंग से पंजाब के अलग-अलग इलाकों में जुलूस तथा जलसा प्रदर्शन किया गया। डॉ सत्यपाल और डॉक्टर की किचलू ने  अमृतसर में रोलेट एक्ट का विरोध करने की मुहिम चलाई। इस आंदोलन में पंजाब के लोगों का बहुत सहयोग मिला। धीरे-धीरे इस आंदोलन ने एक विकराल रूप धारण कर लिया। इतने बड़े आंदोलन से पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर सर माइकल ओडायर घबरा गया।
माइकल ओ डायर ने 2 अप्रैल को पंजाब के डिप्टी कमिश्नर इर्विंग को हुकुम दिया कि वह डॉक्टर सत्यपाल और डॉक्टर किचलू को गिरफ्तार करके पंजाब से दूर भेज दे। डिप्टी कमिश्नर इर्विंग ने 10 अप्रैल की सुबह 10:00 बजे डॉ सत्यपाल और डॉक्टर की किचलू को अपने घर पर बुलाया, डिप्टी कमिश्नर इर्विंग ने सत्यपाल तथा किचलू को गिरफ्तार करके हिमाचल के धर्मशाला में भेज दिया। डॉ सत्यपाल और डॉक्टर की किचलू की गिरफ्तारी सुनकर भारतीयों में गुस्से की लहर दौड़ पड़ी। लगभग 12:00 बजे तक, अमृतसर शहर में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे हो गए, जिससे पूरे शहर का कारोबार ठप हो गया। अमृतसर के बड़े नेता अपने नेताओं की रिहाई के लिए डिप्टी कमिश्नर के घर जाकर उनसे मिलना चाहते थे, परंतु रास्ते में ही इन शांतमई लोगों के ऊपर अंग्रेजी सरकार ने बिना कारण गोलियां चलवा दी। इस घटना में कुछ लोग मारे गए और कुछ लोग जख्मी हो गए। इस घटना को देखकर लोगों में आक्रोश आ गया, उन्होंने बदला लेने के लिए 5 अंग्रेजों को मार दिया। इस घटना के बाद बहुत सारे  लोगों की संख्या में भीड़ इकट्ठी हुई, भीड़ में डाक तार की लाइनों को तोड़ दिया तथा शहर के रेलवे स्टेशनों में आग लगा दी।.  भीड़ पर काबू पाने के लिए अंग्रेजी सरकार ने अमृतसर शहर को वोट के हवाले कर दिया। फौज की कमान जनरल आर. ए. एच.डायर के हवाले की गई। अंग्रेजी सरकार ने जनरल डायर को पूरी तरह खुली छूट दे रखी थी। 12 अप्रैल को जनरल डायर अमृतसर पहुंचकर वहां पर धारा 144 लगा दी, परंतु इस बारे में जनरल डायर ने किसी को भी नहीं बताया और ना ही शहर में धारा 144 के बारे में मुनयादि कराई गई। भारतीयों ने 13 अप्रैल को बैसाखी वाले दिन जलिया वाले बाग में रौलट एक्ट का विरोध करने के लिए घोषणा की। जनरल डायर को भारतीयों की इस घोषणा का पता लग चुका था, परंतु उसने इस आयोजन को रोकने के लिए कोई भी काम नहीं किया। 
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13 अप्रैल 1919 ईस्वी को जलियां वाले बाग में 15 से 20 हजार  लोग आये थे।  क्योंकि उस दिन बैसाखी का दिन था, इसलिए अमृतसर में  मेले को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग आए थे। 13 अप्रैल वाले दिन भारतीयों ने शांतिपूर्ण ढंग से रोलेट एक्ट का विरोध कर रहे थे। बाद में अचानक जनरल डायर बहुत सी संख्या में सैनिकों को लेकर प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंच गया। जनरल डायर ने सैनिकों को लोगों पर बिना किसी चेतावनी के गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। फिर सैनिको ने  लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई।  वह तब तक गोलियां चलाते रहें जब तक उनका बारूद नहीं खत्म हो गया। इस गोलीकांड को देखकर लोगों में भगदड़ मच गई। वह अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे थे। । जलियां वाले बाग का रास्ता 3 तरफ से बंद था और चौथी जगह पर जनरल डायर खुद था, इसलिए लोग गिर गए।चारों तरफ घिरे  हुए लोग चिल्ला रहे थे।  सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस गोलीकांड में 380 लोग मारे गए तथा 1200 लोग जख्मी हुए। घटना के तुरंत बाद शाम के समय को जनरल डायर ने अमृतसर में कर्फ्यू लगा दिया और लोगों को चेतावनी दी "घर से बाहर
निकालने पर उड़े गोलियों से उड़ा दिया जाएगा। " इस कर्फ्यू के कारण बहुत से जख्मी लोगों तक मदद नहीं पहुंच सकी। जलियांवाला बाग कांड के बाद पूरे पंजाब में मार्शल लॉ लगा दिया गया था।



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