कुम्भ
कुंभ मेले का इतिहास
कुंभ का इतिहास वेदों में बताए गए समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। महाऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण जब देवराज इन्द्र और अन्य देवता कमजोर पड़ गए तब दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया । सभ देवता मिल कर भगवान विष्नु के पास गए। भगवान विष्नु ने देवताओं को दैत्यों के साथ मिलकर समुंद्रमंथन करके अमृत निकालने की सलाह दी। भगवान विष्नु के सलाह अनुसार देवता दैत्यों के साथ सन्धि करके अमृत निकालने का प्रयास करने लगे। कड़ी मेहनत करने के बाद जब अमृत निकला तो देवताओं के कहने पर इंद्रपुत्र जयंत अमृत को लेकर उड़ गया। दैत्यगुरू शुक्राचार्य के आदेश अनुसार दैत्यों ने जयंत का पीछा किया । दैत्यों ने जयंत को रास्ते में भी रोक लिया और अमृत पर अपना अधिकार जमाने के लिए देवताओं और दैत्यों में 12 दिन का घमासान युद्ध हुआ।
मान्यता अनुसार इस युद्ध के दौरान अमृत की 4 बूंदे पृथ्वी पर 4 जगह गिरी। यह 4 जगह प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक है। इसी कारण कुंभ इन चार स्थानों पर लगते है।
 कुंभ मेले की 10 रोचक बातें-
1.कुम्भ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है।
2. कुछ ही समय में टेंटों का एक बड़ा शहर बस जाता है।
3.कुंभ मेले में एक समय में सबसे अधिक लोग इकट्ठे होते है

4.मान्यता के अनुसार कुम्भ में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती। वह देवलोक में चला जाता है।
5.कुंभ मेले में किसी को न्योता नही दिया जाता है।
6.कुंभ मेला तकरीबन 700000 हजार व्यवसाय देता है।
5.कुंभ मेले में किसी को न्योता नही दिया जाता है।
6.कुंभ मेला तकरीबन 700000 हजार व्यवसाय देता है।
 7.कुंभ का पहला स्नान साधु संन्यासी करते है।
8. साल 2013 के कुम्भ में 120 मिलीयन लोग कुम्भ में आये.
9.कुम्भ मेले के इतने लोगो को मैनेज करना दुनिया के सबसे मुश्किल मैनेजमेंट में से एक है।
 10.कुम्भ मेले को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है ।





0 टिप्पणियाँ